Gudhiyari Hanumatkeertikalasham
हनुमच्चरणारविन्दानुग्रहाभिलाषी बन्धुओं! भारतीय संस्कृति के उदात्त वैभव में भक्तिभाव सर्वोपरि स्थान रखता है। यह वही अनुपम स्रोत है, जिससे मनुष्य का जीवन निर्मलता, श्रद्धा और दिव्यता का अनुभव करता है। श्रद्धेय देवताओं में वायुपुत्र श्रीहनुमान भारतीय जनमानस के हृदय में विशेष श्रद्धा और अनुरक्ति के साथ प्रतिष्ठित हैं। उनके चरित्र का प्रत्येक आयाम अचल भक्ति, अतुलित पराक्रम, दृढ़ निष्ठा एवं अनुपम विनय मानव को धर्ममार्ग पर स्थिर करता है और जीवन को दिव्य आलोक से आलोकित करता है।
ऐसे परम पूज्य हनुमानजी की उपासना का एक अतिशय महिमामय केन्द्र छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी क्षेत्र में स्थित है। यह पावन तीर्थस्थल सहस्रों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र तथा उनके जीवन की आध्यात्मिक ऊर्जा का स्त्रोत है। युगों से भक्तजन यहाँ कीर्तन, पूजन और स्तोत्रपाठ के माध्यम से दिव्य आनन्द का अनुभव करते रहे हैं।
इसी पवित्र धरोहर को साहित्यिक कलेवर में प्रस्तुत करने का पुण्य प्रयत्न इस ग्रंथ “गुढ़ियारी हनुमत्कीर्तिकलशम्” में हुआ है। मेरा प्रयत्न रहा कि मैं पूर्ण हनुमद्भक्तों के भक्तिभाव से ओतप्रोत हृदय और गुरुजनों के गहन अनुसंधानशील दृष्टि द्वारा एकत्रित विषयों तथा मंदिर के ऐतिहासिक आयामों को एक ग्रंथ में एकत्रित कर पाऊँ। साथ ही कतिपय आवश्यक प्रतीत होने वाले स्तोत्रों, प्रार्थनाओं, कवचों और स्तुतिपाठों का रचना करने का प्रयत्न भी किया गया है। मैने इस पुष्प को ‘कीर्तिकलश’ का रूप प्रदान करने का लघुप्रयत्न किया है। इस कलश में मेरा स्वयं का कुछ नहीं अपितु सिद्ध सुधीजनों की श्रद्धा का अमृत, भक्ति का मधु और ज्ञान की दिव्य गन्ध एकत्रित होकर हम जैसे प्राणियों के मन को तृप्त करने के लिए प्रस्तुत है।
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