पंडित कमलेश पुण्यार्क जी द्वारा संकलित चार सौ पृष्ठों की इस अनुपम कृति “षोडश संस्कार विमर्श” का प्रकाशन अत्यन्त सीमित संख्या में किया गया है। पुस्तक का मूल्य ₹ 500/ है लेकिन सुधी पाठकों की सुलभता के लिए इसका विशेष मूल्य मात्र ₹ 300/ (तीन सौ रुपए) रखा गया है।
मग-मार्त्तण्ड कमलेश पुण्यार्क जी द्वारा संकलित षोड़श संस्कार विमर्श नामक पुस्तक अपसंस्कृति को बचाने के लिए प्रकाश स्तम्भ है । घनघोर अँधेरे में जलता हुआ ज्योति पुंज ।
पुस्तक के आरम्भ में संकलक ने इसे आने वाली पीढ़ी को समर्पित किया है । मेरी समझ से विद्वान लेखक का यही लक्ष्य भी है ।मानव शास्त्र में सामाजिक मान्यताओं का बड़ा महत्व है । मनुष्य के अनगढ़ जीवन को संस्कारों से ही दुरुस्त और अनुशासित रखा जा सकता है । वेद , पुराणों , उपनिषदों में इसी संस्कार का वर्णन है । मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत की जीवन यात्रा में चाहे अनचाहे इन्हीं संस्कारों के बीच से होकर गुजरना होता है । यह भी सच है कि अब भी सनातन संस्कारों का कुछ न कुछ विधान अपसंस्कृति के शोर में भी जीवित है । पुण्यार्क जी का यह अवदान निःसन्देह सनातन संस्कारों को पुनर्जीवन प्रदान करेगा ।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
ज्योतीन्द्र मिश्र, पटना
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