“मग तिलकः” – पंडित रामधन पाठक विरचित (हिंदी अनुवाद सहित)
“मग तिलकः” नामक यह पुस्तक मूल संस्कृत के साथ हिंदी रूपान्तरण के आकर्षक कलेवर में हमारे सामने है। तीन भागों और २१२ पृष्ठों में सजी यह पुस्तक मग इतिहास की अनुपम धरोहर है। कथ्य और तथ्य दोनों अकाट्य तर्कों पर आधारित है और सब कुछ पौराणिक वांग्मय से सोदाहरण स्पष्ट किया गया है। इस पुस्तक की कम से कम एक प्रति हर शाकद्वीपीय ब्राह्मण के घर पर होनी ही चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी अपना गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके।
-“मग तिलकः” – मूल रचयिता – पंडित रामधनपाठक जी;हिंदी रूपांतर -डॉ मधुसूदन पाण्डेय जी। प्रकाशक- मग जागृति फाउंडेशन ट्रस्ट , रांची झारखण्ड; २०२२
अभी कोई review नहीं है — पहला Review आप ही दें!
Login करें सवाल पूछने के लिए।
अभी कोई सवाल नहीं है — पहला सवाल आप ही पूछें!