विद्वानों की नजर में साम्बायन…
प्रायः शाकद्वीपियों के गुणों-अवगुणों की चर्चा होती है किंतु इसका उल्लेख शायद ही होता है कि इनमें से अधिकांश परम अधीत, लेखकीय क्षमता के धनी और एक साथ विभिन्न गुणों की खान होते हैं, फिर भी ये आत्मश्लाघा से बचते हैं । ऐसे ही एक सौम्य विद्वान् हैं पं. ज्योतीन्द्र मिश्र । मिश्र जी की साम्बायन नितांत पठनीय और रोचक तो है ही, हमें आत्म-निरीक्षण के लिए भी प्रेरित करती है । इस दिशाबोधक पुस्तक के लेखक-प्रकाशक को बधाई । मुझे विश्वास है यह पुस्तक हाथों-हाथ ली जाएगी और हमें सुमार्ग भी दिख लाएगी ।
– प्रो. अशोक प्रियदर्शी, प्रसिद्ध साहित्यकार, आलोचक, राँची.
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