🔥 कूपन कोड FREE5 से 499₹ कार्ट पर 7 बार 5% की छूट!
info@vedantastore.com  |  📞 07974406748
Categories

Satyanarayan Katha ebook

Sold by Surta
₹51.00 ₹50.00
📦 In Stock
सारे तीरथ बार बार-गंगासागर एक बार‘‘ और ‘‘धर्म करे धन नाही घटे‘‘ सामाजिक जीवन परिवेष की कथायें हैं जिनके साथ कोई न कोई कथा जुड़ी हुई है। मनु स्मृति में सतयुग त्रेता द्वापर और कलयुग की कल्पना की गई है। हिन्दी साहित्य के इतिहास में आदिकाल या वीरगाथा काल के बाद हिन्दी साहित्य इतिहास के स्वर्णकाल ‘‘भक्तिकाल‘‘ का आरंभ होता है -तुलसीदास का ‘‘रामचरितमानस‘‘ और कबीर की ‘साखी, सबद रमैनी‘ इसी भक्तिकाल की देन है जिसमें ईश्वर तक पहुँचने के कठिन और सरल मार्ग साधनायें वर्णित हैं । महाकवि और छत्तीसगढ़ के जनमानस में रचबस गयें तुलसीदास ने इतिहास के एक मोड़ पर ईष्वर के इस धरती पर अवतरित होने का विष्वास व्यक्त किया है - ​जब जब होय धर्म की हानि, ​बढ़ैं अधर्म असुर अभिमानी । ​तब तब प्रभु धर मनुज शरीरा, ​हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा ।। कुछ इस तरह का ही एक प्राचीन विश्वास ‘‘श्री सत्यनारायण कथा‘‘ में है कि ‘मृत्युलोक‘ (पृथ्वी) पर सत्यनारायण की कथा में व्रत कर्ता के जीवन में सुख समृद्धि, मानसिक शांति और जीवन के कष्ट-क्लेश मिट जाते हैं। ‘‘श्री सत्यनारायण कथा‘ अपने पॉंच अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में प्राप्य थी इसे हिन्दी काव्य रूपांतर में प्रस्तुत किया गया है ।

Description

सारे तीरथ बार बार-गंगासागर एक बार‘‘ और ‘‘धर्म करे धन नाही घटे‘‘ सामाजिक जीवन परिवेष की कथायें हैं जिनके साथ कोई न कोई कथा जुड़ी हुई है। मनु स्मृति में सतयुग त्रेता द्वापर और कलयुग की कल्पना की गई है। हिन्दी साहित्य के इतिहास में आदिकाल या वीरगाथा काल के बाद हिन्दी साहित्य इतिहास के स्वर्णकाल ‘‘भक्तिकाल‘‘ का आरंभ होता है -तुलसीदास का ‘‘रामचरितमानस‘‘ और कबीर की ‘साखी, सबद रमैनी‘ इसी भक्तिकाल की देन है जिसमें ईश्वर तक पहुँचने के कठिन और सरल मार्ग साधनायें वर्णित हैं । महाकवि और छत्तीसगढ़ के जनमानस में रचबस गयें तुलसीदास ने इतिहास के एक मोड़ पर ईष्वर के इस धरती पर अवतरित होने का विष्वास व्यक्त किया है - जब जब होय धर्म की हानि, बढ़ैं अधर्म असुर अभिमानी ।

तब तब प्रभु धर मनुज शरीरा, हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा ।। कुछ इस तरह का ही एक प्राचीन विश्वास ‘‘श्री सत्यनारायण कथा‘‘ में है कि ‘मृत्युलोक‘ (पृथ्वी) पर सत्यनारायण की कथा में व्रत कर्ता के जीवन में सुख समृद्धि, मानसिक शांति और जीवन के कष्ट-क्लेश मिट जाते हैं। ‘‘श्री सत्यनारायण कथा‘ अपने पॉंच अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में प्राप्य थी इसे हिन्दी काव्य  दोहा, चौपाई रूपांतर में प्रस्तुत किया गया है।

Ratings & Reviews

अभी कोई review नहीं है — पहला Review आप ही दें!

❓ सवाल-जवाब

Login करें सवाल पूछने के लिए।

अभी कोई सवाल नहीं है — पहला सवाल आप ही पूछें!

मिलते-जुलते Products

In Stock -25%
साम्बायन
Sold by Magbandhu
₹200.00₹150.00
In Stock -40%
षोडश संस्कार विमर्श
In Stock -25%
मग तिलकः
Sold by Magbandhu
₹200.00₹150.00