श्रीमद्भागवत महापुराण भारतीय सनातन वाङ्मय का अनुपम रत्न है। यह केवल भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का दिव्य ग्रन्थ ही नहीं, अपितु संस्कृत काव्य एवं छन्दशास्त्र का भी अद्भुत भण्डार है। महर्षि श्रीकृष्णद्वैपायन वेदव्यास जी ने इस महाग्रन्थ की रचना में विविध प्रकार के संस्कृत छन्दों का अत्यन्त कलात्मक एवं प्रसंगानुकूल प्रयोग किया है, जिससे प्रत्येक श्लोक में भाव, रस, माधुर्य और काव्य-सौन्दर्य का अद्वितीय समन्वय दृष्टिगोचर होता है।
प्रस्तुत कृति "श्रीमद्भागवत जी के छन्द" में श्रीमद्भागवत महापुराण में प्रयुक्त सभी प्रमुख छन्दों का क्रमबद्ध एवं सरल परिचय प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रत्येक छन्द का नाम, लक्षण, संरचना, श्रीमद्भागवत में उसका प्रयोग तथा उसकी संख्या का प्रामाणिक विवरण दिया गया है, जिससे पाठक एवं भागवत-अध्येता सहज रूप से छन्दों की पहचान एवं उनके स्वरूप को समझ सकें।
इसके अतिरिक्त संस्कृत साहित्य में प्रचलित प्रमुख छन्दों का भी सरल एवं सुबोध परिचय दिया गया है। साथ ही श्रीदुर्गासप्तशती, श्रीरामचरितमानस में प्रयुक्त संस्कृत छन्द, तथा पूजन, स्तुति, ध्यान, मन्त्र, विवाह के शाखोच्चार, आशीर्वाद एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त विविध संस्कृत छन्दों का भी समावेश किया गया है। इस प्रकार यह ग्रन्थ केवल भागवत के अध्ययन तक सीमित न रहकर संस्कृत छन्दशास्त्र का एक उपयोगी एवं व्यावहारिक संदर्भ-ग्रन्थ बन जाता है।
यह कृति भागवत-कथावाचकों, संस्कृत के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, आचार्यों, पुरोहितों तथा छन्दशास्त्र के जिज्ञासुओं के लिए समान रूप से लाभदायक सिद्ध होगी। सरल भाषा, व्यवस्थित प्रस्तुति तथा प्रामाणिक सामग्री इसे अध्ययन एवं अध्यापन—दोनों की दृष्टि से विशेष महत्त्व प्रदान करती है।
प्रस्तुति : भागवताचार्य पं. श्रीमनोज पाण्डेयजी
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