घाघ-भड्डरी की कहावतें भारतीय लोकज्ञान, कृषि-विज्ञान और जीवन-अनुभव का अनुपम संग्रह है। इस पुस्तक में लोककवि घाघ और भड्डरी द्वारा कही गई प्रसिद्ध कहावतों का संकलन एवं व्याख्या प्रस्तुत की गई है। इन कहावतों में खेती-बाड़ी, ऋतु परिवर्तन, वर्षा के संकेत, पशुपालन, स्वास्थ्य, व्यवहार, नीति, सामाजिक जीवन तथा प्रकृति के गहन निरीक्षण पर आधारित व्यावहारिक ज्ञान समाहित है।
घाघ-भड्डरी की उक्तियाँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ियों के अनुभवों से उपजा ऐसा लोकविज्ञान हैं जो आज भी अनेक परिस्थितियों में प्रासंगिक दिखाई देता है। सरल, सहज और लोकभाषा में रचित ये कहावतें ग्रामीण संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा की समृद्धि का परिचय कराती हैं।
यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, साहित्य-प्रेमियों, किसानों तथा भारतीय लोकसंस्कृति में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी है। प्रत्येक कहावत जीवन को व्यवहारिक दृष्टि से समझने, प्रकृति के संकेतों को पहचानने तथा अनुभव-आधारित निर्णय लेने की प्रेरणा देती है। यदि आप भारतीय लोकबुद्धि, ग्रामीण जीवन और परंपरागत ज्ञान की अनमोल विरासत को समझना चाहते हैं, तो "घाघ-भड्डरी की कहावतें" आपके पुस्तक-संग्रह का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक ग्रंथ सिद्ध होगी।
अभी कोई review नहीं है — पहला Review आप ही दें!
Login करें सवाल पूछने के लिए।
अभी कोई सवाल नहीं है — पहला सवाल आप ही पूछें!