शाकद्वीपीय ब्राह्मणों के विषय में एक प्रामाणिक पुस्तक *मगतिलक:* लगभग अस्सी वर्ष पूर्व संस्कृत भाषा में लिखी गई है, लेकिन हमें इसके प्रकाशन, उपलब्धता, हस्तलिखित होने आदि की आधी-अधूरी हीजानकारी उपलब्ध थी। हम निरतंर प्रयास करते रहे अन्ततः इसकी अनुपलब्ध प्रकाशित (दो खंड) एवं हस्तलिखित (तृतीय खंड) की पांडुलिपि मिली।
ईश्वर कृपा से समाज के पुरोधा पं. कमलेश पुण्यार्क जी ने इसे दुबारा संस्कृत में टंकित कर पुनर्जीवित करने काकठिन कार्य पूर्ण किया है एवं डॉ. मधुसूदन पाण्डेयजी ने तीनों खण्डों का हिन्दी अनुवाद हमें उपलब्ध करा दिया है। इस महती कार्य को पूर्ण करने मेंप्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. अशोक प्रियदर्शी एवं युवा प्रतिभा डॉ. शैलेश मिश्र ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मेरा योगदान इसके मात्र समन्वयक की है। बहरहाल मेरी दृष्टि में यह एक असाधारण-कार्य था, जिसका प्रकाशन मग जागृति फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
212 पृष्ठों की यह अनमोल पुस्तक पाठकों के लिए उपलब्ध है। इस ऐतिहासिक प्रकाशन हेतु सहयोग राशि ₹ 150/- मात्र रखा गया है।
Vendor Biography
शाकद्वीपीय ब्राह्मणों के विषय में एक प्रामाणिक पुस्तक *मगतिलक:* लगभग अस्सी वर्ष पूर्व संस्कृत भाषा में लिखी गई है, लेकिन हमें इसके प्रकाशन, उपलब्धता, हस्तलिखित होने आदि की आधी-अधूरी ही जानकारी उपलब्ध थी। हम निरतंर प्रयास करते रहे अन्ततः इसकी अनुपलब्ध प्रकाशित (दो खंड) एवं हस्तलिखित (तृतीय खंड) की पांडुलिपि मिली।
ईश्वर कृपा से समाज के पुरोधा पं. कमलेश पुण्यार्क जी ने इसे दुबारा संस्कृत में टंकित कर पुनर्जीवित करने का कठिन कार्य पूर्ण किया है एवं डॉ. मधुसूदन पाण्डेय जी ने तीनों खण्डों का हिन्दी अनुवाद हमें उपलब्ध करा दिया है। इस महती कार्य को पूर्ण करने में प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. अशोक प्रियदर्शी एवं युवा प्रतिभा डॉ. शैलेश मिश्र ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मेरा योगदान इसके मात्र समन्वयक की है। बहरहाल मेरी दृष्टि में यह एक असाधारण-कार्य था, जिसका प्रकाशन मग जागृति फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
212 पृष्ठों की यह अनमोल पुस्तक पाठकों के लिए उपलब्ध है। इस ऐतिहासिक प्रकाशन हेतु सहयोग राशि ₹ 150/- मात्र रखा गया है।
(डॉ. सुधांशु शेखर मिश्र, राँची, झारखण्ड. मो. 9431561424 )