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  • “मग तिलकः” – पंडित रामधन पाठक विरचित (हिंदी अनुवाद सहित)

    0 out of 5
    Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹150.00.

    “मग तिलकः” नामक यह पुस्तक मूल संस्कृत के साथ हिंदी रूपान्तरण के आकर्षक कलेवर में हमारे सामने है। तीन भागों और २१२ पृष्ठों में सजी यह पुस्तक मग इतिहास की अनुपम धरोहर है। कथ्य और तथ्य दोनों अकाट्य तर्कों पर आधारित है और सब कुछ पौराणिक वांग्मय से सोदाहरण स्पष्ट किया गया है। इस पुस्तक की कम से कम एक प्रति हर शाकद्वीपीय ब्राह्मण के घर पर होनी ही चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी अपना गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके।

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  • (भागवत रहस्य का नया संस्करण) श्रीमद् भागवत रसामृत

    0 out of 5
    Original price was: ₹800.00.Current price is: ₹680.00.

    (श्रीमद् भागवत के बारह स्कन्धो की सरल हिन्दी भाषा में व्याख्या)

    पुज्यपाद श्रीरामचंद्र डोंगरेजी महाराज

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  • Avyangabhanu

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    Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹200.00.

    Avyangbhanu is a collection of amazing and unique Sadhna Vidhan of Lord Surya. It is based on Pratishtha of “Avyang” which is the first step of Surya Sadhana.

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  • Mahabharat granthakar

    0 out of 5
    Original price was: ₹3,620.00.Current price is: ₹3,300.00.
    1. महाभारत ग्रन्थाकार—महाभारत भारतीय संस्कृतिका, आर्य सनातन-धर्मका अद्भुत महाग्रन्थ है। इसे ‘पंचम वेद’ भी कहा जाता है। इस महाग्रन्थमें उपनिषदोंका सार, इतिहास, पुराणोंका उन्मेष, निमेष, चातुर्वर्णका विधान, पुराणोंका आशय, ग्रह, नक्षत्र, तारा आदिका परिमाण, तीर्थों, पुण्य देशों, नदियों, पर्वतों, समुद्रों तथा वनोंका वर्णन होनेके कारण यह अनन्त गूढ़, गुह्य रत्नोंका भण्डार है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इसमें निखिल रसामृत-सिन्धु, अनन्त प्रेमाधार भगवान् श्रीकृष्णके गुण-गौरवका गान है। छ: खण्डोंमें प्रकाशित यह ग्रन्थ-रत्न हिन्दू संस्कृृतिके अध्येताओंहेतु मननीय और संग्रहणीय है। सचित्र, सजिल्द।
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  • Mahabharata-Khilbhag Harivansh Puran (Hindi)

    0 out of 5
    Original price was: ₹520.00.Current price is: ₹490.00.

    महाभारत-खिलभाग हरिवंशपुराण ग्रन्थाकार— हरिवंशपुराण वेदार्थ-प्रकाशक महाभारत ग्रन्थका अन्तिम पर्व है। पुत्र-प्राप्तिकी कामनासे हरिवंशपुराणके श्रवणकी परम्परा भारतवर्षमें चिरकालसे प्रचलित है। अनन्त भावुक धर्मपरायण लोग इसके श्रवणसे पुत्र-प्राप्तिका लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भगवद्भक्ति तथा प्रेरणादायी कथानकोंकी दृष्टिसे भी इसका बड़ा महत्त्व है। भगवान् श्रीकृष्णसे सम्बन्धित अगणित कथाएँ इसमें ऐसी हैं, जो अन्यत्र दुर्लभ हैं। धाॢमक जन-सामान्यके कल्याणार्थ इसके अन्तमें सन्तानगोपाल-मन्त्र, अनुष्ठान-विधि, सन्तान-गोपाल-यन्त्र तथा संतान-गोपालस्तोत्र भी संगृहीत है। सचित्र, सजिल्द।

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  • Raspanchaadhiyayi Rasleela ebook

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    Original price was: ₹151.00.Current price is: ₹121.00.

    इस कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है गोपीगीत को उसके मूल छंद कनकमंजरी में उसी प्रकार आबद्ध किया गया है जिस प्रकार मूल गोपीगीत है । इसकी दो विशेष्ताएं है एक प्रत्येक चरण के प्रथम और सातवां वर्ण एक समान है और दूसरा प्रत्येक पद के दूसरा वर्ण एक समान है । शिल्पगत इन विशेषताओं को समेटते हुए इसी शिल्प के साथ इस गोपिकागीत की रचना की गई है । इसी प्रकार चौथे और पांचवें अध्याय को भी मूल छंद में ही अनुदित किया गया है ।

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  • Satyanarayan Katha ebook

    0 out of 5
    Original price was: ₹51.00.Current price is: ₹50.00.

    सारे तीरथ बार बार-गंगासागर एक बार‘‘ और ‘‘धर्म करे धन नाही घटे‘‘ सामाजिक जीवन परिवेष की कथायें हैं जिनके साथ कोई न कोई कथा जुड़ी हुई है। मनु स्मृति में सतयुग त्रेता द्वापर और कलयुग की कल्पना की गई है। हिन्दी साहित्य के इतिहास में आदिकाल या वीरगाथा काल के बाद हिन्दी साहित्य इतिहास के स्वर्णकाल ‘‘भक्तिकाल‘‘ का आरंभ होता है -तुलसीदास का ‘‘रामचरितमानस‘‘ और कबीर की ‘साखी, सबद रमैनी‘ इसी भक्तिकाल की देन है जिसमें ईश्वर तक पहुँचने के कठिन और सरल मार्ग साधनायें वर्णित हैं । महाकवि और छत्तीसगढ़ के जनमानस में रचबस गयें तुलसीदास ने इतिहास के एक मोड़ पर ईष्वर के इस धरती पर अवतरित होने का विष्वास व्यक्त किया है – ​जब जब होय धर्म की हानि, ​बढ़ैं अधर्म असुर अभिमानी । ​तब तब प्रभु धर मनुज शरीरा, ​हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा ।। कुछ इस तरह का ही एक प्राचीन विश्वास ‘‘श्री सत्यनारायण कथा‘‘ में है कि ‘मृत्युलोक‘ (पृथ्वी) पर सत्यनारायण की कथा में व्रत कर्ता के जीवन में सुख समृद्धि, मानसिक शांति और जीवन के कष्ट-क्लेश मिट जाते हैं। ‘‘श्री सत्यनारायण कथा‘ अपने पॉंच अध्यायों में संस्कृत के श्लोकों में प्राप्य थी इसे हिन्दी काव्य रूपांतर में प्रस्तुत किया गया है ।

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  • Shiv tandav strotam in Hindi ebook

    0 out of 5
    Original price was: ₹61.00.Current price is: ₹51.00.

    यह शिव तांडव स्त्रोत पूरी तरह हिंदी में ही है, हिंदी पद्य में पंचचामर छंद पर ही है । मूल शिव तांडव स्त्रोत्र संस्कृत भाषा में पंचचामर छंद पर लिखी गई है। यह हिंदी में इसका पद अनुवाद है किंतु यह मूल रचना के अत्यंत निकट है क्योंकि यह पदानुवाद भी मूल छंद पंचचामर छंद पर ही लिखी गई है। जो व्यक्ति मूल शिव तांडव स्त्रोत्र को संस्कृत में नहीं गा सकते वह इस रचना को उसी लय पर हिंदी में गा सकते हैं गा सकते हैं, पाठ कर सकते हैं । यह पदानुवाद शिल्प और भाव की दृष्टि से मूल रचना की समान ही है ।

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  • Shrimad Bhagwat mahapuran

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    Original price was: ₹760.00.Current price is: ₹700.00.

    श्रीमद्भागवतमहापुराण ग्रन्थाकार—श्रीमद्भागवत भारतीय वाङ्मयका मुकुटमणि है। भगवान् शुकदेवद्वारा महाराज परीक्षित् को सुनाया गया भक्तिमार्गका तो मानो सोपान ही है। इसके प्रत्येक श्लोकमें श्रीकृष्ण-प्रेमकी सुगन्धि है। इसमें साधन-ज्ञान, सिद्ध-ज्ञान, साधन-भक्ति, सिद्धा-भक्ति, मर्यादा-मार्ग, अनुग्रह-मार्ग, द्वैत, अद्वैत समन्वयके साथ प्रेरणादायी विविध उपाख्यानोंका अद्भुत संग्रह है। कलिसंतरणका साधन-रूप यह सम्पूर्ण ग्रन्थ-रत्न मूलके साथ हिन्दी-अनुवाद, पूजन-विधि, भागवत-माहात्म्य, आरती, पाठके विभिन्न प्रयोगोंके साथ दो खण्डोंमें उपलब्ध है।

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  • छत्‍तीसगढ़ी कविता संग्रह- ‘सुरता’

    0 out of 5
    Original price was: ₹121.00.Current price is: ₹101.00.

    यह पुस्‍तक छत्‍तीसगढि़या छंदकार रमेश चौहान द्वारा लिखी गई है । इसमें छत्‍तीसगढ़ की संस्‍कृति के अनुरूप उपयोगी कविताएं संग्रहित है ।

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  • षोडश संस्कार विमर्श – पंडित कमलेश पुण्यार्क जी द्वारा

    0 out of 5
    Original price was: ₹500.00.Current price is: ₹300.00.

    पंडित कमलेश पुण्यार्क जी द्वारा संकलित चार सौ पृष्ठों की इस अनुपम कृति “षोडश संस्कार विमर्श” का प्रकाशन अत्यन्त सीमित संख्या में किया गया है। पुस्तक का मूल्य ₹ 500/ है लेकिन सुधी पाठकों की सुलभता के लिए इसका विशेष मूल्य मात्र ₹ 300/ (तीन सौ रुपए) रखा गया है।

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  • साम्बायन – पं. ज्योतींद्र मिश्र

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    Original price was: ₹150.00.Current price is: ₹100.00.

    विद्वानों की नजर में साम्बायन…
    प्रायः शाकद्वीपियों के गुणों-अवगुणों की चर्चा होती है किंतु इसका उल्लेख शायद ही होता है कि इनमें से अधिकांश परम अधीत, लेखकीय क्षमता के धनी और एक साथ विभिन्न गुणों की खान होते हैं, फिर भी ये आत्मश्लाघा से बचते हैं । ऐसे ही एक सौम्य विद्वान् हैं पं. ज्योतीन्द्र मिश्र । मिश्र जी की साम्बायन नितांत पठनीय और रोचक तो है ही, हमें आत्म-निरीक्षण के लिए भी प्रेरित करती है । इस दिशाबोधक पुस्तक के लेखक-प्रकाशक को बधाई । मुझे विश्वास है यह पुस्तक हाथों-हाथ ली जाएगी और हमें सुमार्ग भी दिख लाएगी ।
    – प्रो. अशोक प्रियदर्शी, प्रसिद्ध साहित्यकार, आलोचक, राँची.

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