Shri Laxmi Narayan Mandalam
Sold by Surta
₹1,000.00
₹800.00
📦 In Stock
श्री लक्ष्मी नारायण मण्डलम यह सवा दो हाथ (3*3 वर्गफीट) आकार में कपड़े की सिलाई से तैयार की गई रंगीन वेदी है। इसे पाटे पर डाल कर पूजा के लिए उपयोग में लाई जा सकती है । बार-बार श्री लक्ष्मी नारायण मण्डल बनाने की आवश्यकता नहीं है । यह बनी-बनाई है और धुलाई योग्य है । कुछ लोग प्लेक्स पर इसका प्रयोग करते हैं, इससे कई गुणा बेहतर यह कपड़े का वेदी है । इसे काटन कपड़ों से तैयार किया जाता है । वास्तु के अनुरूप तैयार किया जाता है, यह पूजा उपयोग के लिए अति उत्तम है ।
Description
श्री लक्ष्मी-नारायण मण्डल - यज्ञादिक अनुष्ठान के लिए :
उत्पाद का विवरण:
श्री लक्ष्मी-नारायण मण्डल एक विशेष वैदिक चक्र है, जिसका प्रयोग किसी भी शुभ अवसर, पर्व, त्यौहार, या विशेषकर यज्ञादिक अनुष्ठान के लिए किया जाता है । इस मंडल को मंगलप्रद एवं कल्याणकारी माना जाता है। इसका प्रयोग विशेष रूप सक लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में प्रधान वेदी के रूप में किया जाता हैै । यज्ञ यागादिक, देव प्रतिष्ठा, मांगलिक पूजा महोत्सव, अनुष्ठान इत्यादि देव कार्यों में लक्ष्मी नारायण मंडल का सर्वविध उपयोग किया जाता है।
डिज़ाइन:
इस चक्र को एक आधार कपड़े (अस्तर) पर सफेद कपड़े के ऊपर 32 गुणा 32 के 1024 खण्ड़ों में विभाजित किया गया है, भिन्न-भिन्न खण्ड्रा़ में शास्तोक्त रंगों के प्रयोग किया गया है । इन खण्ड़ों के बाहरी परीधि पर सम, रज और तम के प्रतीक के रूप में क्रमश: सफेद, लाल एवं काले रंग का घेरा लगाया गया है ।
आकार और धरातल:
इस मंडल चक्र को 3*3 वर्ग फीट (सवा दो हाथ) के आकार में एक धरातल (अस्तर) कपड़े पर सफेद रंग की वस्त्र ऊपर 32*32 के 1024 खण्ड़ों पर विभिन्न रंगों का प्रयोग करते हुए शास्तोक्त लक्ष्मी-नारायण मण्डल सिलाई की सहायता से उकेरा गया है ।
आसान प्रयोग:
इसे पूजा स्थान पर पाटे या चौकी पर रखकर आसानी से प्रयोग में लाया जा सकता है, और यज्ञ यागादिक, देव प्रतिष्ठा, मांगलिक पूजा महोत्सव, अनुष्ठान इत्यादि देव कार्यों में इसका प्रयोग किया जा सकता है ।
धुलाई योग्य:
इस मंडल को धुलने में कोई दिक्कत नहीं है, जिससे इसे बार-बार प्रयोग में लाया जा सकता है, जो इसे अधिक प्रयोगी बनाता है।
लक्ष्मी-नारायण मण्डल एक प्राचीन वैदिक वेदी मण्डल है और इसका प्रयोग ज्ञ यागादिक, देव प्रतिष्ठा, मांगलिक पूजा महोत्सव, अनुष्ठान इत्यादि देव कार्यों में पूजन के लिए किया जाता है। इससे साधक के अभीष्ट की सिद्धि होती है।
Ratings & Reviews
अभी कोई review नहीं है — पहला Review आप ही दें!
❓ सवाल-जवाब
Login करें सवाल पूछने के लिए।
अभी कोई सवाल नहीं है — पहला सवाल आप ही पूछें!